वैसे तो ज्यादातर व्यक्ति बुद्ध के ही बारे में लिखते हैं,
पर कोई ये समझा शायद या फिर, किसी ने इस बारे
में लिखा हो तो मैने पढ़ा नहीं,
"अक्सर उनकी पत्नी उनकी राह देखा,करती थी,
पर उन्हें कोई ख़बर मिलती तो किसी तरह से खुद को
समझा लेती थी, यहां पर कभी भी किसी ने उन इस्त्रियो
की बात नहीं की जिनके साथ बुद्ध राज महल में, लम्बे समय तक रहे,तो क्या कोई विश्वाश के साथ कह सकता हैं,की उनका केवल एक ही पुत्र था,या उनकी कोई बेटी
भी थीं,नहीं,क्योंकि उन लोगो के बारे में जानकारी दी ही
नहीं गई,बावजूद इसके कि बुद्ध ने बुद्ध बनने की प्रक्रिया
के दौरान उन सबके लिए कुछ न कुछ किया,"
यदि कोई धर्म के नज़रिए से मेरी ब्लॉग को पड़ेगा तो शायद , नाराज़ हो सकते हैं फिर भी सच यही है कि
इस समय बुद्ध का सिर्फ एक बेटा नहीं था,बल्कि वो भी
अधिकारी थे जिनको उनके याने की बुद्ध के पिता,ने बुद्ध
के पास रखा था,और बुद्ध ने उतनी छोटी उम्र में ही सभी
के कर्ज चुका दिए थे, कैसे? इसका सबूत मै न दे सकती हूं और न ही देना चाहती हूं,सिर्फ इतना ही कह सकती हूं
बुद्ध ने किसी को अप्सरा,किसी को दुर्गा,किसी को काली,और किसी को सरस्वती के रूप में स्थापित किया,
इसके अतिरिक्त ऐसे बहुत से लोग जो उनके साथ चले,उन्हें यथा संभव उनके व्यवहार,और गुणों के अनुसार उचित स्थान प्रदान किया,और यही कारण है कि पूरे विश्व में आगे जा कर विभिन्न धर्म पुनः स्थापित हुए,
तो जो लोग यह कहते हैं कि हिन्दू या अन्य देवी देवता की परिकल्पना को बुद्ध ने नकार दिया तो, हैरानी नहीं,क्योंकि,बुद्ध के उनका त्याग,और स्थापना दो ही की जरूर थी 👍
मल्लिका जैन
अस्तु
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