कभी किसी ने सोचा है,हंसी कितनी प्यारी है,ये,तब आती हैं,जब,हम भी पता नहीं होता कि हम हंस देंगे, इट्स, ब्यूटीफुल, क्या कभी किसी साधू को हंसते हुए देखा है,जो उसकी वास्तविक अवस्था में हो,ऐसी हंसी,जब भी आती हैं ये कल्याण कारी होती हैं,मुझे लगता हैं,बुद्ध भी
कभी संघ में हंसते होंगे बिल्कुल इंसान जैसे,ही,सोचिए कि बुद्ध जब हंसते हो तो कितनों का कल्याण होता होगा, एक बार बुद्ध से (भंते,नाम याद नहीं इसलिए इसका प्रयोग किया) ने पूछा,आप क्या इस्त्री को संघ में शामिल क्यों नहीं करते वे भी इसकी अधिकारी है,तब बुद्ध मुस्कुरा दिए,और फिर इस्त्री संघ की स्थापना भी हुई,जिन्हें हम कई नामों से जानते हैं,ये सच है कि इनके बारे में कम लिखा या सुना गया,या फिर उन्हें किसी रहस्य जैसा रखा गया,क्योंकि यहां जो नियम है,जिनमें स्पर्श, स्वाद,आदि का वर्णन मिलता है,ये भी स्वत ह शामिल हो गए,ऐसी इस्थीती में,निश्चित ही,कुछ विशेष नियम बने,और पल्लवित भी हुए, जिनमें से कई को लोग,बुद्ध के इस्त्री स्वरूप के रूप में भी मानते,है
उन्हीं में से एक है, देवी तारा, कम ही लोग इस बात को
जानते है कि,"तारा" बुद्ध का हंसता हुए और क्रोध पूर्ण
दोनों स्वरूप में है,⭐
मल्लिका जैन
अस्तु
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