वातावरण में कई तरह से परिवर्तित होता रहा है, जिससे
बुद्ध कालीन समय भी अछूता नहीं है,फर्क इतना है,
तब मानव जाति और बाकी लोगों की शरिक आकृति
में,अधिकतम लम्बाई हुआ करती थी मतलब उनकी हाइट, और उसी अनुपात में मोटापा भी जिसे हम आज कल फेट के नाम से भी जानते हैं, तो आज का वातावरण
विशेष रूप से साल 2020 एक अद्भुत क्षमता वाला समय है,यंहा,अनगिनत परिवर्तन हो रहे है,, जिन्हें देखकर हमे या विज्ञानिको को ये लग सकता हैं कि वे इसे समझते हैं,(पर वास्तव में धर्म और विज्ञान एक सिक्के की तरह ही है) यंहा, अनगिनत संभावनाएं हैं, बात सिर्फ इतनी है कि हम वास्तविक नज़रिया कैसा रखते हैं,और बुद्ध इस बात को इतनी अच्छी तरह से समझते थे कि,उन्हों ने कहा "नमो तस्य भगवतो अरहतो सम्मासम बुधस्य"जो वर्ग इस बात को समझ लेते हैं, वे लोग नाराज हो या खुश हो या फिर सामान्य अर्थात न्यूटल, वे सदैव,एक ऐसी दशा में रहते हैं, जो शायद वे ही समझ सकते हैं, आप कुछ भी करें एक न एक दिन यह नियम लागू हो ही जाता हैं
मल्लिका जैन😁
अस्तु
भोजन,का स्वास्थ्य पर असर पड़ता हैं, बिल्कुल वैसे ही वातावरण का भी, फिर भी,
जवाब देंहटाएंसमझदार, योग्य, व्यवहार करते है😁