क्या हुआ होगा जब उस समय के बुद्ध ने अपने समकालीन लोगो को किसी ऐसे की पूजा या वार्शिप करते हुए देखा होगा, जिनमे कुछ थोड़ी संभावनाएं रही होंगी,? आज इसे मै अपने आस पास महसूस करू तो भी क्या ये सच में स्पिरिट वर्ल्ड हैं,🌝 यदि ये आज के समय का सत्य है कि व्यक्ति के साथ वहीं आगे चल सकते हैं,जो उसके साथ पहले से चल रहे है,मतलब ऐसी बाते जो उसने अपने परिवार ,मित्र,और बाकी लोगो से सीखी, वे ही उसके साथ चलती हैं और जब कोई ओरा को स्पष्ट करने की कोशिश करता है,तो वह व्यक्ति जो ये कार्य कर रहा है सामने वाले से उसकी वो सद्भावनाएं लेे लेता है जो उसके बेनिफिट में सहायक होती हैं,कभी कभी कोई हायर एंग्री यंग गुस्से वाला हुआ तो, डिस्ट्रक्टिव, भी लेे लेते हैं और उन्हें किसी न किसी ऑब्जेक्ट में जिन्हे लोग रत्न या ऐसे ही किसी और नाम से अपने सुरक्षा के लिए उपयोग करते हैं,उसमे बंद कर देते हैं,ये सिर्फ इतना ही है जिसे समय समय पर निकलते हैं जिसे क्लिनिग प्रोसेस कहा जाता हैं उसकी जगह किसी अन्य को इंप्लांट कर देते हैं,अब यह पर जो इस्पिरिट हैं वो खुद को डील कैसे करें, तो बंद रहेगी,तो सदैव ही निकालने का प्रयास करेगी, और ...