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😁मिनिग ऑफ अल्टीमेट ब्लिस😀

अल्टीमेट ब्लिस मन और शरीर के साथ दिमांग का समुचित उपयोग, अब सवाल उठता है कि ऐसी इस्थिति कब बनती हैं क्या किसी रटी हुई शब्दावली या मंत्र उच्चारण से या फिर स्वयं में समझ का विकास किसी सर्वश्रेष्ठ स्तर तक हो जाने पर, ये समझ सिर्फ स्वयं के विकास की इस्थिति सर्वश्रेष्ठ बन जाने पर ही बनती हैं, प्रकृति, और खुद में समझ का विकास कैसे उत्पन्न होता हैं, ये कई तरह की स्थिति और विचार क्रम और समस्याओं के समाधान के निराकरण स्वयं से प्रप्त कर लेने पर ही बनती हैं, किसी को हानि या लाभ पहुंचाने से नही,यँहा सिर्फ सर्वश्रेष्ठ को उचित सम्मान भी अक्सर वृतालप का विषय बन जाता हैं, क्योकि जब यह समझ आ जाए कि स्वयं कौन हैं तो फिर कई बातें लगभग स्पष्ट होने लगती हैं, ये इस्थिति एक हद तक तो ऐसी है जैसे  किसी को असीमानंद की प्राप्ति हो ये साधन अत्यंत उच्च स्तर के होते है जो किसी को समझ ऐ जा सके ऐसी उपलब्ध ता निश्चित ही उपयोगी होती हैं, यँहा पर विभिन्न तरह की बातें स्पष्ट होती हैं जैसे क्या कोई देवी देवता आपके सहयोग बनते है या आपको विभिन्न तरह के आनर्गल सच्चाई का सामना करना पड़ता हैं, जो इतनी अजीबोगरीब होती हैं कि ...