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😈अस्तित्व 👥

अपने ही अंदर के,मन के साथ,जीना सभी को होता है, शायद ही ऐसा कोई होगा,जो अपनी हकीकत किसी को वैसी ही बता पाए,पर क्यो? क्योंकि, कुछ सत्य ऐसे भी होते हैं,जिनसे वह व्यक्ति खुद भी परिचित नहीं होता,अब यदि कोई सम्पूर्ण रूप से परिचित हो भी जाए तो क्या वह कह सकता या कह सकती हैं वह ही सब कुछ जानता है? यदि ऐसा किसी भी के साथ हुआ तो इसका मतलब हुआ की उस सम्बन्धित व्यक्ति ने,अपने दिमाग पर काबू पाना सीख लिया है, और इसी सभी बाते जो एक सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं है,वो वह सब जान गया या गई है,अब, यहां सवाल ये उठता है कि अब वो खुद क्या करें?क्योंकि यह स्टेज ऐसी हैं, जंहा,अस्तित्व खत्म मतलब अब सिर्फ दिखावा बचा हैं, क्योंकि जिसने सब जाना वो केवल उसको ही यह समझा सकता हैं कि, "देखो यार ये मेरी कुछ समस्याएं है क्या अब तुम कुछ कर सकते हो,या फिर ये की चल आज कुछ नया करते हैं" तो जिसे हम अस्तित्व के नाम से जानते हैं वो यह है, जब हमारा वजूद खत्म हो जाता हैं,हम जानते हैं कि ऐसा ही गया और दूसरो को लगता है,वो इस अब जानने वाले से बेहतर है,अब जब कोई इस भी ऐसा होता है तो तब भी अपनी ही तरह से जीता है,और बावजू...