🌾🌿तथागत की कई कहानियां धम्म पद में और उनके कई ग्रंथो में लिखी गई हैं जिन्हें लगभग ऐसा लिखा या कहा मेने ऐसा सुना, तो तथागत ने जो भी बताया वह उतना ही सार गर्भित आज भी है, जब तथागत महल में थे तब भी वे यह नही जानते थे कि दुःख जैसा भी कुछ होता हैं, और जब महल छोड़ दिया तब वे यह जनते थे कि सुख को छोड़ दिया और दुःख को कैसे सहन या कैसे उसके साथ जीना है यह जानने के लिए वन को गए वँहा भी कई सम्मानित लोगो से मीले और बहुत कुछ सीखा, पर जब उन्हें कोई जवाब न मिला तो उन्होंने स्वयं ही अपनी एक नई राह चुनी,वो राह क्या है यह भी उनके या सुने गए फिर लिखे गए कई बातों से स्पष्ट है पर उन्होंने वास्तव में क्या पाया होगा यह में अपने ही शब्दों में लिख रही हूं🌾🌿 "जीवन ,जब महल में थे तब राग रंग और सुख के सिवा उनके पिता ने उन्हें कुछ भी देखने ही नही दिया,तो क्योकि वे एक ऐसी स्थिति में रहे होंगे जब उन्होंने जन्म या जीवन को जान लिया कि कोई अणु जब सक्रिय होता हैं तो वह जीवन कैसे बनता है शायद गर्भ के सिद्धांत को पूर्ण रूप से समझ लिया था, फिर जब वे वन में तपस्या कर खुद को तैयार कर रहे थे तब स्वयं के अनुभव से ...