हर दिन विचार करते है कि समस्याए का निराकरण कैसे हो सकता हैं, पर कही न कही कुछ ऐसा होता हैं जो विचार,व्यवहार और व्यवस्था में सुधार के साथ चलता है जिनका व्यवस्था आवश्यक होती हैं जिनमे सुधार की जरूरत होती हैं, पर कोई उन्हें करना नही चाहते ,किसी का कुछ और किसी का कुछ जिस कारण से एक ऐसा तारतम्य व्यवस्थित होता हैं जो सदैव ही सुधार की इस्थित में होता हैं, जिन्हें सुधारना ही होता हैं, पर बात यँहा पर रुकी होती हैं कि उत्तरदायित्व कौन उठायेगा, सहायता किसे मिलनी चाहिये और किसे नही यह भी विचारणीय प्रश्न बन जाता हैं ऐसे सवाल और जवाब की तरह जो कभी तो सदैव ही सवाल होते है और जो कभी ऐसे सवाल जिनके उत्तर सामने ही होते है पर समझ और उपयोग में लाना आसान कैसे बने इस बात पर रुके होते है, जब बात बुध्द की हो तो वे सदैव ही ऐसी व्यवस्था के साथ चले जो किसी पर लादी न जाये बल्कि व्यवहार में और प्रयोग और उपयोग में आसन हो मतलब जिसे किसी उत्तरदायी व्यक्ति से करवाया जाए और उचित को उसका लाभ प्रप्त हो सके। 😀मल्लिका singh har din vichaar karate hai ki samasyae ka niraakaran kaise ho sakata hain, par kahee na kahee ...