बुद्ध ने शायद ही कभी इस बात का अंदाज लगाया होगा,
की,उनकी कही हुई, बातों का अभी इस प्रयोग भी होगा,
जब लोग इस बात को,ठीक वैसा ही समझ पाएंगे,जैसा वे कहतें है,संघ में बुध्द ने,कभी भी इस बात से इनकार नही, किया कि तकलीफ होने पर ट्रीटमेंट न किया जाएं,
बल्कि हमेशा,यह बतलाया कि हम सही ,तरह से उपाय औषधि का प्रयोग करे,वे ये अच्छी तरह सर जानते,और समझ ते थे,की,एक ऐसी इस्थिति, भी आई हैं, जब सही,
तरह से,वास्तविक स्थिति नही बनती तो लोग उसका गलत,फायदा भी उठा सकतें, है,इसलिए,उन्होंने स्वयं
इस बात का ध्यान संघ में रखा,की,स्वयं में ही अर हत्व की प्राप्ति हो, ताकि, कोई,नकली वातावरण तैयार न करे,
साथ ही,समर्थ वान ही बुद्ध बन सकें, क्योंकि जब कोई इस वास्तविक इस्थिति में पहुंच जाते हैं तो, उन्हें,अपने आप, ही एक ऐसी अवस्था की प्राप्ति होती हैं, जो प्रशंशा
के योग्य होती हैं, न कि किसी का मज़ाक, या फिर धोखा दे कर,वर किसी व्यक्ति को वाहक बनाने के खिलाफ ही रहें,साथ ही यह भी ध्यान रखते थे कि, कोई, अनुभव के
स्तर पर भी,योग्य हो न कि दिखावा करने वाला,यही कारण था कि लम्बे समय तक उन्होंने, इस्त्री वर्ग को संघ
में नही लिया,बाद में उनका अलग संघ अभिक अनुरोध
होने पर स्थापित किया,अचेतन मन पर नियंत्रण, जब दूसरे व्यक्ति करते है तो वे अपनी सुविधानुसार, ऐसी
प्रक्रिया,का प्रयोग करते है जो, उचित नही होती, साथ
वे अच्छी तरह से जान गए थे कि, सब इसके अधिकारी
नही बन सकते,क्योंकि, सभी वास्तविकता को समझ नहीं सकते,और उसका प्रयोग जान कर या फिर प्रयोग
के स्तर पर सफल या असफल के बार बार प्रयास में,
वे संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जो न तो स्वयं उसके
हित मे होता हैं और न ही अन्य के हित मे😇
मल्लिका जैन😇
अस्तु
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