बुद्ध ने आरोग्य के नाम पर लोगो को ठगा नहीं,
न ही कभी किसी की शक्तियों को नस्ट किया,
वे हमेशा इस पक्छ में ही रहे की लोग उसका दूर उप
योग न करें,आज का समय लोगो के लिए तकलीफ
दायक या फिर किन्ही के लिए स्वासथ्यवर्ध्दक इसलिए भी ही गया है,क्योंकि यहां,पर कई
छेत्रो में व्यक्ति की वास्तविक ऊर्जा का प्रयोग लोग
स्वयं करते हैं और, इन्सान सिर्फ इतना ही समझ ता है
उसने कुछ नहीं किया क्योंकि,एक ऐसे एहसास, में रखा
जाता है जनहा लोग उस के साथ कुछ भी करें,उसका इंसान को पता ही नहीं चलेगा की उसने क्या किया?तो अच्छा यही है,की आरोग्य,याने स्वास्थ्य के नाम पर ढोंग,न ही किया,जाए तो,बेहतर, बुद्ध ने कभी भी किसी के अध्यात्मिक,तथ्य का उलंघन नहीं किया, है न ही ये कहा की,आप किसी दूसरो के अधिकरबका उलंघन करें,क्या किसी ने कभी भी ये सोचा है की क्या होगा,जब कोई व्यक्ति,ही किसी व्यक्ति को किन्ही कारणों से यहां से वहां भेज दे,और खुद उस व्यक्ति को पता ही न चलें,क्योंकि,,आप से जों लोग ऊपर है या जो तथा कथित अपने आप को ऊपर समझ ते हैं आप को आराम के नाम पर, एक नई, अवस्था में डाल दे,और आपको ये पता ही न चलें,की आप ने किया क्या, इसलिए भी बुद्ध, ऐसी बातों के जीनाफ ही रहें,उन्होंने,व्यक्ति को स्वयं में, इच्छा के साथ जीना सिखाया,न कि, मूर्च्छा या फिर इच्छा के विरुद्ध किसी को,ऐसा कुछ भी बताया को खुद उस व्यक्ति के हित,में न,मुझे नहीं लगता कि किसी ने भी, विशेष तौर, पर,किसी को ये कहा हो की कही का कर सफाई की व्यवस्था देखो तो स्वास्थ्य लाभ होगा, क्योंकि सत्य के धरातल,बेहद तकलीफ दायक है, यहां जीवन मृत्यु,लोगो के लिए खेल का मैदान बन गया है क्योंकि इंसान की मजबूरी का फायदा उठाने में किसी ने कोई कसर नहीं छोड़ी,न तो ये बुद्ध का अध्यात्म था, न ही आरोग्य सुख,निरोगी काया,का मतलब एक कि ऊर्जा का प्रयोग दूसरे के हित में, करना,और क्या हो को आपके ही घर में आपके अपने,परिवार में ही आपको,एक ऐसी वास्तविक इस्थिति का सामना करना पड़े,जिसे आप भगवान की पूजा कहते है,वह वास्तव में झूठ के पुलिंदे से ज्यादा और कुछ न हों,ये न तो किसी का ईश्वर होना ही है और न,ही किसी को ये अधिकार की,ऊपर से हमारा देश तो, एक ऐसे संविधान का पालन करता है जिसे बुद्ध के मानने वाले,ने कहते है एक बार में तैयार कर दिया था,तो बुद्धको समझ पाना आसान नहीं है,न ही कभी होगा, यनहा लोग स्वार्थ या बहुजन हिताय की सिर्फ बात करते हैं,कुछ भी,वास्तविक अवस्था या सत्य,झूठ से भरा हुआ है,जों लोगो के हित में नहीं है,
और ये आरोग्य या फिर स्वास्थ्य, बुद्ध ने कुछ और कहा और समझा भी।
मल्लिका जैन😱
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें