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अवेकनिंग विथ सेल्फ💆

कई लोगो ने बुद्ध की कथाओं को सुना,और बहुतों ने उसे
समझ ने कि लगातार कोशिश भी की,और अब भी करते रहते हैं,तो उनमें से एक कथा है अंगुली माल की,तो सबसे पलहले वर्तमान के उन सभी गणमान्य व्यक्ति यो
से, माफ़ी क्यो शायद इसका उत्तर आगे जान जाएंगे,!
😄कोई बेहद खास समय रहा होगा जब बुद्ध अंगुली
माल के पास पहुंचे,तो कथा कहती हैं (ऐसा मैने भी सुना है) की अंगुली माल बुद्ध को लगातार चलते हुए देख रहे थे,जबकि वो खुद एक ही स्थान पर खड़ा हुए था,आगे की कथा सभी जानते ही हैं, असल में बुद्ध अंगुली के उन सभी तकलीफों को स्वयं ही लेे रहे थे,जो अंगुली माल को
क्रूर बना रही थी,मतलब उस इस्प्रिट गाइड  को जो अंगुली माल को हत्या के लिए और वास्तविकता से दूर कर देती थी,मतलब उसके दिमाग के किसी हिस्से में
क्रूरता भर देती थी,जब बुद्ध ने जान और देख लिया की अब अंगुली माल का समय पूर्ण हो गया हैं और वो अपने
तय लक्ष्य से दूर हो जाएगा,तब सही समय पर बुद्ध ने उसे उस िइस्थीती में पहुंचने में सहायता कि जो उसके जीवन का लक्ष्य था,तो इसका मतलब स्पष्ट है,बुद्ध ( जो उस समय में थे और जिनकी कथाओं को हम लोग सुनते हैं),वे स्वयं में इसी कई स्पिरिट के साथ चलते थे जो,
शक्ति शाली होती थी,इतनी की उग्रतम को भी शांत बनाने में सहायता करती थी,साथ ही उनके द्वारा दी गई
शिक्षा को ध्यान से समझें तो पता चलता है,की वे सदैव की करुनिक रहे, और ऐसा वो इसलिए कर पाए क्योंकि
बुद्ध ने राज परिवार में क्षत्रिय वंश में जन्म लिया था और  युद्ध नीति को अच्छी तरह से जानते थे,(यांह पर मेरा उद्देश्य की सी भी वजह से वंश या धर्म के नाम पर बिना वजह बहस में पड़ना नहीं है), तो मतलब सिर्फ इतना है, की जब भी कोई इस स्टेज में होता है,की वह
अपनी अवेकनींग की तरफ बढ़े,तो,निश्चित ही उसके संचित पुण्य कार्य उसके सहायक होते है,या फिर किसी
ऐसे करूनिक की जरूरत होती हैं,जो अपने संचित पुण्य से दूसरे का कल्याण करने में समर्थ हो,और इन से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया  को एकदम सटीक तरीके से जानता हो,वह ही ऐसा कर सकते हैं न कि किसी तरह के स्वार्थ में प्रयोग करें,साथ ही यह भी पूर्ण सत्य है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी प्रकार से या उसके द्वारा बनाई गई या किसी ऊर्जाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया को समझ लेता है वह ही ऐसा कर सकते है, नहीं तो संबंधित व्यक्ति दोनों या तीनों की ऊर्जा को हानि हो होगी,और अपने तय लक्ष्य की जगह स्थाना नानतरित हो जाएगी,मतलब कार्य तो होगा पर वह सटीक नहीं होगा😄
नोट:- मैं   किसी पर आरोप नही लगा रही हूं बल्कि सत्य बता ने कि कोशिश कर रही हूं।
मल्लिका जैन 🌝

टिप्पणियाँ

  1. जब भी कोई ऊर्जाओं से संबंधित प्रक्रियाओं को, इंप्लांट करते हैं,सही तरह से तो इसमें कई तरह की बाते शामिल होती हैं, तो कोई भी व्यक्ति यह तब ही कर सकता हैं,जो मानसिक रूप से और भावना त्मक रूप से,
    सक्षम हो,साथ ही,स्पष्ट रूप से जानता और समझ सकता हो की,समय में जाना और पुनः वापस आने के प्रयास में किस तरह की ऊर्जा सहायक होगी,और उचित मार्ग कौन सा है,तभी वह सही तरह से ऐसे कार्यों को कर सकते हैं 🌝

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  2. इसका एक मतलब यह भी है कि, बुद्ध, वैज्ञानिक,भी थे,मतलब कई तरह के रसायन विज्ञान को जानते और समझते थे,इस लिए,
    उन्हें नागार्जुन भी कहा जाता हैं

    जवाब देंहटाएं

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