सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वर्तमान समय और धर्म

वास्तव में कभी भी,या किसी भी समय में यह नहीं कहा
जा सकता कि,जो में जानती हूं वह ही सच है सच इससे
आगे,भी ही सकता हैं,तो आज के वर्तमान समय याने sun2020 मतलब मेरे हिसाब से ये दोनों तरह की ताकत को ज्यादातर व्यक्ति और किसी समय पर राज करती हैं,उन्हें सामान अधिकार दिया गया है वो आगे आए और जो चाहती है कर सके पर,क्या व्यक्ति ये जानते हैं वो शक्तियां कोन सी है,शायद कुछ व्यक्ति जरूर
इसके बारे में जानते होंगे,🌝(ये हमेशा की तरह वो शक्तियां हैं जिन्हें व्यक्ति अच्छा या बुरा समझ लेते हैं और,फिर उसके अनुसार अपनी ज़िन्दगी को जीते हैं)
तो फिर ,"धर्म" क्या है, वेल चलिए थोड़ा सा मेरे विचारों
के अनुसार समझ ते हैं, धर्म का मतलब होता है,व्यक्ति,समझ,उससे संबंधित कानून,और राजनीति, लेकिन जब कोई भी साधु या संत अपने अनुसार व्यवहार करते हैं तो,इसी तरह उनकी भी अपनी व्यवस्थाएं बन जाती हैं, तो जैसे व्यक्ति अपनी कई बातों
को किसी को नहीं बताते, इन लोगो को भी उस सुप्रीम से
,(यदि कोई वांहा तक पहुंच सका तो🌝,क्योंकि व्यवस्था इसी होती है कि वन्हॉ कोई पहुंच न सके,क्यो ?क्योंकि यदि हर किसी ने आदि और अंत जान लिया तो उस सुप्रीम की सत्ता खत्म😄)तो दोस्तो हकीकत यही है,अब  में ट्रैवल करने जैसे प्रयोग यदि एक आम व्यक्ति के पास आ जाए तो वह क्या करेगा,सिर्फ अपने स्वार्थों में उन्हें नस्ट कर देगा,ये सच है इसलिए बेहद जांच परख 
के बाद है किसी को वो सुप्रीम जानकारी की प्राप्ति होती हैं,बावजूद इसके के की यह जानकारी हर एक व्यक्ति शरीर में प्रदान कि गई है,लेकिन वो इसे पहचान नहीं पाते,क्योंकि व्यवस्था सही क्या है मतलब की वो कौन सी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति उस सुप्रीम को जान सके यह व्यक्ति अपनी इच्छाओं के कारण समझ नहीं पाते हैं,इसलिए हर समय समस्याओं पर डूबे रहते हैं, तो व्यक्ति एक बनी बनाई परिपाटी पर चलते रहते हैं,
जो उन्होंने अपने परिवार से सीखी होती हैं,इसलिए भी "धर्म"को समझ नहीं पाते,जबकि ये पूर्ण रूप से वैज्ञानिक आधार पर चलता है बावजूद इसके कि जो लोग अपने परिवार की परंपरा का पालन करते है,वो भी धीरे धीरे इसी मार्ग पर चलते रहते हैं, तो यही वजह है कि
🌝🌝🌝🌝🌝🌝😈😈😈🌝🌝🌝🌝🌝🌝
 " बुद्ध ने कहा बुद्ध म् शरणं गच्छामि,क्योंकि वर्तमान बुद्ध याने वह व्यक्ति जो अपने समय में इस सब को जान गया, धम्म शरणं गच्छामि,याने वर्तमान बुद्ध ने जो धर्म में महत्वपूर्ण योगदान दिया, संघम शरणं गच्छामि, याने ऐसा संघ जो उन वर्तमान बुद्ध के साथ चलने को तैयार हुआ,
🌝🌝🌝🌝🌝🌝🌝😈😈😈🌝🌝🌝🌝🌝
मल्लिका जैन 😄

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क हाउ लॉ बिहाइड गेन व्हाट इज माय सेल्फ रियालिजेशन डूइंग विथ रिस्पोनसिबिलीटी इस इंपॉर्टेंट डील विथ सेल्फ एंड ट्रीट विथ द पिपुल, मेनेजेबल थिंग इस इंपोर्टेंट ट्रस्ट स्ट्रेंथ ऑल इस वर्किंग ऑनली व्हेयर सेल्फ पीपुल वी हैव इफ नॉट व्हाट शुड वी डू, कलेक्टिव फोर्स एंड परसेपशान यूज ऑल मेनेजेबल पोसिबिलिटी गिव अंसार  इन दिस ऑल प्रोसेस फैमिली मेंबर इस ऑलवेज इंपोर्टेंट। मल्लिका

🎉जय मंगल👣

💀किसी विशेष ग्रह दशा में पैदा होना फिर उसके लिए तैयारी करना,जिसके लिए वह पैदा हुआ यह तब तक संभव नही जब तक शसक्त और समर्थ स्वयं न हो इसके साथ स्वयं का होश में होना,किसी भी आवश्यक अवस्था जो किस प्रकार से बनाई जा रही हैं तब यह जरूरी होता है,हम जब  भी  उस संबंधित कार्य को करे उसका पूर्ण हो जाने में सक्षम हो, जैसे की कोई डिमांड करते है तब वह कंप्लीट होती है,यह जिसके अफर्ट में कंप्लीट व्यवस्था शामिल हो ह्यूमन बॉडी (कंप्लीट फंक्शन) मेटल बॉडी (रिस्पॉन्सिबिलटी) इमोसनल बड़ी(फंक्शन माइंड थॉट क्रिएट फ्रॉम) चाइल्ड हुड ट्रामा डील विथ सेल्फ एंड फैमिली फैमिली कल्चर डे तो डे थॉट क्रिएशन डील विथ सेल्फ विथ पोलाई टनेस इस सब के साथ हम कोन सा टूल प्रयोग करते है, अपनी समस्याओं को हल करने के लिए जैसे अपने व्यवहार और व्यवसाय में कैसे है,अपने सभी बर्ताव के साथ  👽 मल्लिका जैन 😀😃😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄

सत्य और झूठ जीवन जीने के प्रयास

🙏🕉️☸️⚛️✡️सबसे पहले सवाल उठता है क्या इतने वर्षो की तपस्या सफल हो पाएगी, जवाब कोन देगा, क्या किसी बेवकूफी से भरे हुए  रीती रिवाज में परिवर्तन संभव है सवाल ये है की जिसे हमने यूनिवर्स का क्रिएटर माना है क्या वो क्रिऐटर हैं क्या हम उसे जानते हैं, शायद हां या जो मै जानती हूं वो सत्य कुछ और ही है, तो अब क्या करें क्योंकि शरीर हैं तो जीवन तब तक हैं जब तक जीना ही पड़ेगा अब जब समस्या कोई उत्पन्न हो तो क्या करे, ईच्छा के अनुरूप परिणाम क्या क्रिएटर देगा या वो देना नही चाहता क्या वो बाध्य हैं मुझे उतर या मेरे मन चाहे  फल की प्राप्ति के लिए, या जवाब और भी उसके पास हो सकते है,  मुझे जो चाहिए वो ही चाइ मम व्यक्तित्व मम कार्य प्रित्यार्थे कार्य सिद्ध यार्थे  आवाह्न करिश्ये  मल्लिका जैन 🌟🌅💀🏵️🌕 🕉️☸️⚛️✡️The first question that arises is whether so many years of penance? Will it be successful, who will answer, is it possible to change some foolish customs, the question is whether the one whom we have considered as the creator of the universe is the creator, do we know him,...