क्या हुआ होगा जब उस समय के बुद्ध ने अपने समकालीन लोगो को किसी ऐसे की पूजा या वार्शिप
करते हुए देखा होगा, जिनमे कुछ थोड़ी संभावनाएं रही होंगी,?
आज इसे मै अपने आस पास महसूस करू तो भी क्या ये
सच में स्पिरिट वर्ल्ड हैं,🌝
यदि ये आज के समय का सत्य है कि व्यक्ति के साथ
वहीं आगे चल सकते हैं,जो उसके साथ पहले से चल रहे है,मतलब ऐसी बाते जो उसने अपने परिवार ,मित्र,और बाकी लोगो से सीखी, वे ही उसके साथ चलती हैं और जब कोई ओरा को स्पष्ट करने की कोशिश करता है,तो वह व्यक्ति जो ये कार्य कर रहा है सामने वाले से उसकी वो सद्भावनाएं लेे लेता है जो उसके बेनिफिट में सहायक होती हैं,कभी कभी कोई हायर एंग्री यंग गुस्से वाला हुआ तो, डिस्ट्रक्टिव, भी लेे लेते हैं और उन्हें किसी न किसी ऑब्जेक्ट में जिन्हे लोग रत्न या ऐसे ही किसी और नाम से अपने सुरक्षा के लिए उपयोग करते हैं,उसमे बंद कर देते हैं,ये सिर्फ इतना ही है जिसे समय समय पर निकलते हैं जिसे क्लिनिग प्रोसेस कहा जाता हैं उसकी जगह किसी अन्य को इंप्लांट कर देते हैं,अब यह पर जो इस्पिरिट हैं वो खुद को डील कैसे करें, तो बंद रहेगी,तो सदैव ही निकालने का प्रयास करेगी, और उस व्यक्ति को
पहना देते हैं,बस यही उस पहने हुए व्यक्ति की सहायता करती है, हैं ये सिर्फ वहीं कर सकते है जो एक्स्पर्ट हो नहीं,तो इस्पीरिट और व्यक्ति दोनों को तकलीफ़ हो सकती हैं,
तो बुद्ध ने इसे समझ लिया होगा,और उन्हें उपयोग के लिए,बताया होगा,जो इसके काबिल रहे होंगे, ये आज के समय में भी ऐसा ही है🌝
मल्लिका जैन 🌝
किसी भी रत्न का उपयोग,भी समय समय पर ट्रीटमेंट मांगता है,यदि वो किसी भी कारण से टूट गया है तो,इसका मतलब है,उसमे जो ऊर्जा उस व्यक्ति है, वो किसी ऐसे कार्य के लिए या तो उसने खुद खर्च की जो उसकी सीमा से बाहर था,या फिर किन्हीं ऐसे लोगो द्वारा उपयोग की गई जो लगातार अपने फायदे के लिए उसका उपयोग कर रहे थे। ये प्रत्येक धर्म का विज्ञान है,जिसे सबने समय समय पर योग्य को बताया है, .
जवाब देंहटाएंइसे ऐसा समझें कि ये एक तरह का कानून व्यवस्था है,जो उपयोग करने वाला तभी उपयोग कर सकते है,जब वह खुद उस कानून से एसोसिएटेड,हो🌝,नहीं तो हमेशा ही,एक वर्ग ऊपर रहेगा,और नीचे, ये इंट्रेस्टिंग
फैक्ट और भी बढ़ जाता हैं,जब व्यवस्था सही होती है।
मानव के अंदर के रत्न को बुद्ध ने पहचान लिया था.
जवाब देंहटाएं