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संदेश

🤠समस्या और समाधान😷

हर बार कोई न कोई समस्या उत्पन्न हो सकती हैं, पर उसके समाधान भी होते है, अक्सर व्यक्ति की सोच कही किसी और से प्रभावित हो सकती हैं,पर जरूरी नहीं है कि वह देर तक बनी रहे उसी प्रकार वयक्ति की दीन चर्या प्रभावित होती हैं, फिर वह किसी एक पैटर्न की तरह बन सकती हैं, यह बेहतर और बेहतर अनुभव के साथ सतत विकास की ओर आकर्षित होती हैं, क्योकि हर बार समस्या का कोई न कोई हल उपाय खोजना ही होता हैं, और बुद्ध ने हमेशा इस बात को समझने और समझाने का प्रयास किया है, उन्होंने देवी देवता या अन्य से इनकार नही किया और उन्हें सही राह पर  हमेशा चलने को प्रेरित किया, क्योकि जब कोई बुद्ध की इस्थिति में होता हैं तब वह वास्तविक समस्या और उसका वास्तविक समाधान जानते है😇 🌼मल्लिका जैन🌺

बुद्ध पूर्णिमा

जिन्हें हम बुध्द के नाम से जानते है, उनके उत्सव में ज्यादातर तर मानने वालों ने उसे अपनी भक्ति के अनुसार मनाया,पर सवाल ये है कि कितने लोग उन्हें सच में समझ पाते है, उन्होंने ने अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट कभी नही त्यागी और न ही किसी को ऐसे रास्ते पर चलने को कहा, बुद्ध और महावीर दोनो ही सम कालीन थे जंहा महावीर अत्यंत ही कठिन रास्ते पर चले और अपना सर्वस्व त्याग दिया वंही बुध्द ने मध्यम मार्ग को चुना,फिर भी दोनो ने कभी किसी की बुराई नही की दोनो जानते थे कि समय बदल जाता है पर, उन्होंने हमेशा मानवता का साथ दिया,बावजूद इसके की वे दोनों इस सब से परे थे,किसी मे भी  इन्वॉल्व नही थे सदैव ही पास आने वालों को सत्य बात  देते थे, और उतना ही बताते जितनी जरूरत होती, ऐसा ही एक सत्य ,,, वर्तमान बुद्ध क्या इस इस्थिति में है, जो कुछ भी बता सके तो जवाब है हा जो बुद्ध बन गया वो यह बात सकता हैं कि उसके मानने वाले क्या करें कि उन्हें वह प्राप्त हो जो वे चाहते है।।। 🌸मल्लिका जैन🌷

🔶वर्तमान विज्ञान और धर्म😂

🌟आधुनिकता के विकास के साथ,धर्म भी परिवर्तित होता हैं, अब यदि व्यक्ति स्वयं प्रयास करें तब भी आस पास के वातावरण के साथ कनेक्ट हो सकता हैं,पर यह जरूरी नहीं है, सब वैसे हो, इस बारे में,  " 1 पाने कि इच्छा " इस बात को समझ ने कि कोशिश करते है,की (क्या कोई भी व्यक्ति क्या कर सकता हैं), अपनी इच्छनुसार किस पद,व्यवस्था,आदि, जिसमे जीवन से संबधित सभी आवश्यक सुविधाएं या ये कहे और समझें कि,समुचित विकास के साथ आगे बढ़ना चाहते है,यह ही मात्र सच सभी को प्रतीत होता हैं,और ऐसा है भी, अब जब हम ध्यान से देखे तो इसमें ही कई, बातों को, समावेश हो जाता हैं, इसमें से ही अन्य बातें उत्पन्न होती हैं, जिसे हम सब सफलता के नाम या जीत या विकास आदि कई नामों से जानते और समझते है, जिससे प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती हैं और इसे समाज आसानी से स्वीकार करता है जबकि इसमें छिपी बातों को, समझ नहीं पाते। (इसमें, मानव विकास की वह श्रृंखला जुड़ जाती हैं,जिसे लोग अक्सर विज्ञान के परिवर्तन से और जन्म से समझ ने कि कोशिश भी करते है) 👍 जिनमे ये बाते अनायास ही शामिल हो जाती हैं 2 दुर्भावना 3 दूषित मानस भावना, आलस्य, निष्क्रियत...

🌨️क्रोध 🔥

अक्सर क्रोध तकलीफ का कारण बनता हैं,फिर भी, सकारात्मक दिशा में हो तो,सही रास्ता दिखा सकता हैं, ज़िन्दगी अक्सर तकलीफ ही देती हैं,विशेष रूप से,जब हमे पता हो कि हम खुद सिर्फ किन्हीकारणों से इसमें घिरे हुए हैं,अब यहां समस्या यह है कि,प्रत्येक बात जों भी कहते है वह, कही शांत या क्रोधित कैसे हो सकती हैं, जैसे कि कुछ लोग मिल कर कोई जश्न मना रहे होते है,तब, किसी विशेष की उपस्थिति किसी से निकलने वाले क्रोध को अलग दिशा दे देती हैं,तब क्रोध ही शांत  रूप ले लेता,और जब वह व्यक्ति न हो तो क्रोध नुक़सान करता है,अब मानव शरीर में इन मानसिकताओं को उत्पत्ति के समय है डाल दिया जाता हैं, तो जिस जगह रहने वाले परिवार क्रोधित होंगे तब उत्पन्न भी क्रोध होता हैं,इसी बीच जब शांत वातावरण होता हैं,तब शान्ति होती हैं, तो क्रोध और शांति एक दूसरे के साथ होते है,मतलब विपरीत परिस्थिति साथ होती हैं तब भी जीवन और मृत्यु क्रोध और शांति की तरह निर्वाह करते है,😓 मल्लिका जैन

प्यार शान्ति और देखभाल

ये बात एक छोटी सी, घटना से समझ ते हैं, इन्सान हो या फिर इन्सानों के साथ रहने वाले जानवर या फिर जंगलों में रहने वाले जानवर,ये सब अपने अपने परिवार का ख्याल रखते हैं,इनमें सिर्फ इन्सान ही ऐसा होता हैं,जों,बड़े होने तक अपने साथ रहने वालो का ध्यान रख सकता हैं,जबकि जानवर अपने बच्चो को बड़ा होते ही उनके भावी जीवन के लिए तैयार कर उनसे दूर हो जाते है,यह डिटैचमेंट के साथ ही पुनः अटेचमेंट है, जबकि मनुष्य, अपने क्रोध,प्यार और देखभाल से, घर,समाज, और वातावरण का निर्माण करते है,  यहां बुद्ध इस बात को समझ और जान गए थे कि जीवन मे इस चक्र से बाहर निकल कर पुनः वह ही शुरु हो जाता हैं, इसलिए वे सब को प्रेरित तो करते थे,मगर, चलना, उस व्यक्ति को स्वयं ही होता हैं यह ही समझाते थे,अब कोई यदि इसे बीमार हुआ तो बुद्ध ने दावा दी, उनकी दावा व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक इस्थीती को समझ कर होती थी मल्लिका जैन 💐

नया और पुराना

कितनी बार ही इतिहास उठा कर देखा गया, हर बार बुद्ध को सत्य ही पाया, चाहे विज्ञान की बात हो या धर्म की, बुद्ध ने,तर्क हीन कभी भी कुछ नहीं कहा,ऐसा नहीं  की आज कोई इन बातों को नहीं समझता,फिर भी,जब बुद्ध ने नमो तस्य भगवतो अरहतो कहा तो उन्होंने,इस बात को न सिर्फ शब्दों में कहा बल्कि उसे उस उस दशा मे अपने जीवन काल में जिया भी,अब कोई व्यक्ति,अपने स्वार्थ हित मे बुद्ध को किसी भी धर्म से अलग कहते है, वे शायद यह समझ नहीं पाए या इसका अर्थ अपनी समझ के अनुसार लगाया,आज भी यह उतना ही सत्य है जितना उस समय रहा होगा,मनुष्य,देवी देवता,या स्पिरिट,या अन्य किसी को भी बुद्ध ने अपने पास आने से नहीं रोका लेकिन यह अधिकार किसी को नहीं दिया कि वे बुद्ध पर शासन करे,शाशक बुद्ध स्वयं ही रहे, रही बात अन्य की तो नियम को कोई माने अथवा नहीं, मार्ग उसे बने बनाए मिल जाते है,फिर भी,उन मार्गो पर चलना स्वयं ही होता हैं,💐 मल्लिका जैन

😱बचाना और मरना😀

किसी इंसान के पास जब यह छमता, हो,की वह किसी को वरदान दे सके या फिर श्राप, तो फिर उस व्यक्ति पर इसका क्या प्रभाव  पड़ेगा,साथ ही यह तथ्य भी विचार योग्य हैं,की क्या अन्य भी जो इस ताकत को जानते है,वह उन्होंने कैसे प्राप्त की,और जब पूरी तरह से इस ताकत को प्राप्त हुए लोगो को समझ में आया कि वे इस योग्य हैं,तब क्या हुआ,मतलब यह हुआ,की जन्म और मृत्यु,और इसके मध्य संसार में रहने वाले सभी वर्ग जो इस योग्य हो गए,यहां एक अजीब बात है कि,DNA स्ट्रेचर कई बार बनता और बिगड़ जाता हैं,साथ ही जिसे लोग विभिन्न जीवन प्रणाली समझ ते हैं वह सिर्फ सहायक का समूह बन जाती हैं,अब यहां बात आती हैं, शासन करता उचित हुआ तो व्यवस्था सुचारू होती हैं,यदि शाशन करता ही समझ न पाए तो व्यवस्था दोनों स्तर पर कुछ अलग ही हो जाती हैं,इस बात को वे ही समझ सकते है,जों इस योग्य हो,सब नहीं,बाकी तो सामान्य जीवन जीते हैं,साथ ही जो लोग, शासन करते है,वे हमेशा जीत ना ही चाहते है, कुछ तो इस हद पर पहुंच जाते है,की उन्हे फर्क पड़ना बंद हो जाता हैं, तो अब ये लोग करे क्या क्योंकि सब कर चूके,अब कुछ करने को बचा ही नहीं,यह जो न सिर्फ जान गया बल्क...