ये बात एक छोटी सी, घटना से समझ ते हैं, इन्सान
हो या फिर इन्सानों के साथ रहने वाले जानवर या फिर
जंगलों में रहने वाले जानवर,ये सब अपने अपने परिवार
का ख्याल रखते हैं,इनमें सिर्फ इन्सान ही ऐसा होता हैं,जों,बड़े होने तक अपने साथ रहने वालो का ध्यान रख
सकता हैं,जबकि जानवर अपने बच्चो को बड़ा होते ही उनके भावी जीवन के लिए तैयार कर उनसे दूर हो जाते है,यह डिटैचमेंट के साथ ही पुनः अटेचमेंट है, जबकि मनुष्य, अपने क्रोध,प्यार और देखभाल से, घर,समाज,
और वातावरण का निर्माण करते है,
यहां बुद्ध इस बात को समझ और जान गए थे कि जीवन
मे इस चक्र से बाहर निकल कर पुनः वह ही शुरु हो जाता हैं, इसलिए वे सब को प्रेरित तो करते थे,मगर, चलना, उस व्यक्ति को स्वयं ही होता हैं यह ही समझाते थे,अब कोई यदि इसे बीमार हुआ तो बुद्ध ने दावा दी,
उनकी दावा व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक इस्थीती
को समझ कर होती थी
मल्लिका जैन 💐
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