कितनी बार ही इतिहास उठा कर देखा गया, हर बार
बुद्ध को सत्य ही पाया, चाहे विज्ञान की बात हो या धर्म की, बुद्ध ने,तर्क हीन कभी भी कुछ नहीं कहा,ऐसा नहीं
की आज कोई इन बातों को नहीं समझता,फिर भी,जब
बुद्ध ने नमो तस्य भगवतो अरहतो कहा तो उन्होंने,इस
बात को न सिर्फ शब्दों में कहा बल्कि उसे उस उस दशा
मे अपने जीवन काल में जिया भी,अब कोई व्यक्ति,अपने
स्वार्थ हित मे बुद्ध को किसी भी धर्म से अलग कहते है,
वे शायद यह समझ नहीं पाए या इसका अर्थ अपनी समझ के अनुसार लगाया,आज भी यह उतना ही सत्य
है जितना उस समय रहा होगा,मनुष्य,देवी देवता,या स्पिरिट,या अन्य किसी को भी बुद्ध ने अपने पास आने से
नहीं रोका लेकिन यह अधिकार किसी को नहीं दिया कि वे बुद्ध पर शासन करे,शाशक बुद्ध स्वयं ही रहे, रही बात
अन्य की तो नियम को कोई माने अथवा नहीं, मार्ग उसे
बने बनाए मिल जाते है,फिर भी,उन मार्गो पर चलना स्वयं ही होता हैं,💐
मल्लिका जैन
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