एक बार की बात है बुद्ध,सुबह के समय ध्यान में
मतलब ये देख रहे थे कि उनका कोन सा शिष्य योग्य है,
तब उन्होंने देखा कि एक शिष्य अपने बल से यह पता
लगाने की कोशिश कर रहा है कि दुनिया कैसे बनी,इसका आदि और अंत क्या है,तब बुद्ध ने अपने आप को वांहा रिप्रेजेंट किया और रोक दिया,साथ ही
यह भी कहा कि यह तुम्हारा छेत्र नहीं है, इसका मतलब है कि बुद्ध ऐसा बहुत कुछ जानते थे जो अन्य को नहीं,
जानना चाहिए इसके अतिरिक्त एक मतलब यह भी है कि, शायद उन दृश्यों को देखने के अलावा दिमाग की
इस्थिती यह होनी चाहिए कि वह यथा इस्थीती समझ सके,हो सकता है वह शिष्य उस समय इसके विपरीत रहा हो, यह गाथा धम्म पद की और विचार मेरे अपने,
तो,यदि किसी को पसंद न आए तो क्षमा चाहती हूं
😍मल्लिका जैन 🧘
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