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संदेश

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क हाउ लॉ बिहाइड गेन व्हाट इज माय सेल्फ रियालिजेशन डूइंग विथ रिस्पोनसिबिलीटी इस इंपॉर्टेंट डील विथ सेल्फ एंड ट्रीट विथ द पिपुल, मेनेजेबल थिंग इस इंपोर्टेंट ट्रस्ट स्ट्रेंथ ऑल इस वर्किंग ऑनली व्हेयर सेल्फ पीपुल वी हैव इफ नॉट व्हाट शुड वी डू, कलेक्टिव फोर्स एंड परसेपशान यूज ऑल मेनेजेबल पोसिबिलिटी गिव अंसार  इन दिस ऑल प्रोसेस फैमिली मेंबर इस ऑलवेज इंपोर्टेंट। मल्लिका

🎉जय मंगल👣

💀किसी विशेष ग्रह दशा में पैदा होना फिर उसके लिए तैयारी करना,जिसके लिए वह पैदा हुआ यह तब तक संभव नही जब तक शसक्त और समर्थ स्वयं न हो इसके साथ स्वयं का होश में होना,किसी भी आवश्यक अवस्था जो किस प्रकार से बनाई जा रही हैं तब यह जरूरी होता है,हम जब  भी  उस संबंधित कार्य को करे उसका पूर्ण हो जाने में सक्षम हो, जैसे की कोई डिमांड करते है तब वह कंप्लीट होती है,यह जिसके अफर्ट में कंप्लीट व्यवस्था शामिल हो ह्यूमन बॉडी (कंप्लीट फंक्शन) मेटल बॉडी (रिस्पॉन्सिबिलटी) इमोसनल बड़ी(फंक्शन माइंड थॉट क्रिएट फ्रॉम) चाइल्ड हुड ट्रामा डील विथ सेल्फ एंड फैमिली फैमिली कल्चर डे तो डे थॉट क्रिएशन डील विथ सेल्फ विथ पोलाई टनेस इस सब के साथ हम कोन सा टूल प्रयोग करते है, अपनी समस्याओं को हल करने के लिए जैसे अपने व्यवहार और व्यवसाय में कैसे है,अपने सभी बर्ताव के साथ  👽 मल्लिका जैन 😀😃😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄

सेल्फ रियालिजेशन

🌅 सेल्फ रियालिजेशन सर्च फॉर द ट्रुथ व्हाट I am fesing in लाइफ is डिफरेंट एंड समथिंग इंपॉर्टेंट लाइक अनसीन फैक्ट्स दोस इंवॉल बट व्हेयर my यूनिवर्स ? मल्लिका 

💨🔥🌀🌪️शक्ति और धर्म⚡☔👽

👽☠️👻🐂मेरी शक्ति जो धर्म से जुड़ी है उसे मेरी बात सुन नी है मेरे भूत को मेरा साथ देना है  कोई भी ऐसी बात जो परिवार को तकलीफ दे सकती है, उसे समझ कर साल्व करना है किसी परी या अन्य की किसी भी बात में उलझना पड़े तो ये हमारा मान केसे रखेंगे जो स्वतंत्र हो कर हमे नुकसान पहुंचा रहे है उन्हे उनके कर्म का फल स्वयं भोगना होगा मुझे और मेरे भूत मेरा साथ देना है यन्ह आ किसी भी मात्र या पितृ शक्ति से बड़ कर बात यह है की इस्त्री और पुरुष दोनों को ही एक दूसरे का साथ देना है संबंध  तो कई नाम के है और जो उद्देश्य निश्चित किया है उसे पूरा करना ही है जिसने हमारे पुत्र को नुकसान फुचाया है उसे स्वयं सहायता की जरूरत थी ,तो जो शक्ति स्वयं का मान रखती है वह ही आगे जा पाती हैं,किसी और अवस्था में उसका समाप्त होना तय होता है👻☠️🧠🙏

😀बुद्ध और बॉडी फंक्शन😒

समय के साथ चलना और फिर ये समझ पाना की अब मुझे जंहा पहुंचना है,वंहा पहुंच क्यो नही पा रहे, ये ऐसा लगता हैं जैसे कि कोई स्वयम से सवाल पूछ रहा हो,वर्तमान 2023 में क्या ये संभव है कि बुद्ध हो या उनकी  कोई भी बात वेंसी ही हो जैसी उन्होंने कहि उस समय मे कोई ऐसी डिवाइस रही होगी क्या जो मोबाइल या फिर कैमरे की तरह उनकी बातें कही रिकॉर्ड कर के रखी हो, शायद हा, मेरे हिसाब से ज्यादातर मैने ऐसा सुना से उनकी कही हुई कथाए प्ररंम्भ होती हैं, तो ऐसा क्या है कि वो बुद्ध बन गए, तब उनकी बातें मानी गई या फिर उसके पहले भी उनकी बात मानी जाती रही होगी तो जवाब हा ही है क्योंकि वो राजसिक जीवन जीते थे तो आज्ञा न माने ये संभव नही और जब वो तक वो बुद्ध बने तब और फिर आगे भी उनकी बात मानी ही जाती रही, क्या करते होंगे और कौन सा प्रकार करके उन्होंने अपनी बातों को सिद्ध किया था ये सब तो कई प्रकार से बातों का माध्यम बन सकता हैं पर वर्तमान बुद्ध को क्या वनों में जाना होता हैं या  कोई और व्यवस्था होती हैं यँहा कोई जवाब दे तो हम मान पाएंगे  ये स्वयं ही जानना होता हैं आज कोई किसी भी वस्तु या फिर अपनी गृहस्थी का...

अन्तर्दद्वन्द

💐क्या कोई ईस्वर युद्ध का मैदान बनाता है क्या उसमे कुछ साजो सामान रखता है क्या प्यार के क़सीदे अंत पर ही परवान चढ़ते है क्या जिंदगी बेहतर बनाई जाए इसके लिए किसी को तकलीफ होती हैं,या फिर मुझे वह पता नही जंहा सत्य परतों में बंद रहता हैं, क्या बुध्द ने इन सवालों के जवाब दिये हैं कभी क्या सच कभी दिखाई देगा मुझे,  मल्लिका जैन🌸

🕯️उत्सव💡

उत्सव,जब कोई खुद को समझ कर अपने ही जीवन को उत्सव मय बना ले, हम खुद को कैसे समझते सकते है जब किसी के जीवन मे यह ज्ञात हो जाए कि जिसने उन्नति को प्राप्त कर लिया है वो किसी और अपनी उन्नति देना नही चाहता, पर यँहा उन्नति स्वयं के द्वारा आवश्यक होती हैं, जब किसी की सहायता से,कुछ प्राप्त हो और वह यह बार बार बताए कि मैने आपकी सहायता की है तब उत्सव घटित होने हर बार समय लग जाता हैं, यहां देने वाले कि इच्छा सामने या अनजाने में प्रकट होती हैं तब उत्सव घट नही पाते तब वे पूर्णता की कसौटी पर खरे है या नही इस बात अनुमान मात्रा लगाने में समय को लगा देते है, फिर उत्सव कैसे मनाया जाए उत्सव,साहस समझ शांति और धन का प्रतीक हैं, तन,मन,धन,और इन सब को मिला कर धन, क्योकि अधिकार तब बनता हैं जब स्वयं समर्थ बने, कैसे बनोगे पैदा होने से लेकर पूरे जीवन मे और फिर मृत्यु में भी किसी न किसी की जान कर या अनजाने में सहायता मिलती ही है, तो जब हम मित्र वत व्यवहार को समझ लेते है, और क्रोध या नफरत या अन्य ऐसे प्रवृति जो हमे ऐसे पल में रखती हैं जब हम इन पर सामंजस्य स्थापित करते है तब इसे, उत्सव कहते है, यह जान लेते है कि दूसर...