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🙄सोच और परिवर्तन🌾2

🤔तो अब जब यह समझ आने लगता हैं कि कैसे और कन्हा क्या सभव हो सकता हैं तब क्या किया जाए, तो पुनः दोहराती हूं ये बाते सामान्य को समझने में समय लगती हैं, क्योकि कोई भी एक ऐसे वातावरण को लम्बे समय तक बनाए रखे यह कठिन क्यो बन जाता हैं वो इसलिए कि समय मे परिवर्तन औऱ उसे ठीक बनाए रखना सम्भव है, फिर भी शांत व्यवस्था को बनाए रखने की अपनी ही नीतियां होती हैं, वो क्या होती हैं चलिए आज इसे देखते है🤗 1 अच्छे स्थान पर रहना 2शिक्षा और धन का समुचित उपयोग 3 बिना स्वयम की मर्जी के किसी को ये अधिकार नही      देना की वे आपको ही अपना उपभोग बनाने लगे 4 स्वास्थ्य पूर्ण मुस्कुराहट याने जो हंसी बनावटी न हो 5यँहा उच्च को ही स्थान प्राप्त होता हैं ये सब स्नेह औऱ   अधिकार विचारों का विकसित होना, उनके लिए     समुचित प्रयास स्थापित किए जाते है 6 तो ऐसा स्थान बनाए कंहा, क्योकि उपलब्ध संसाधन     जो बनाए जाते है वे स्वयं के लिए होते है उसका अधिकार किसी को तब तक नही जब तक सामने वाला योग्य हो। 7 अब यँहा अपना राग क्या होता हैं ये भी अक्सर किन्ही के द्वारा दोष का विषय ...

😁मिनिग ऑफ अल्टीमेट ब्लिस😀

अल्टीमेट ब्लिस मन और शरीर के साथ दिमांग का समुचित उपयोग, अब सवाल उठता है कि ऐसी इस्थिति कब बनती हैं क्या किसी रटी हुई शब्दावली या मंत्र उच्चारण से या फिर स्वयं में समझ का विकास किसी सर्वश्रेष्ठ स्तर तक हो जाने पर, ये समझ सिर्फ स्वयं के विकास की इस्थिति सर्वश्रेष्ठ बन जाने पर ही बनती हैं, प्रकृति, और खुद में समझ का विकास कैसे उत्पन्न होता हैं, ये कई तरह की स्थिति और विचार क्रम और समस्याओं के समाधान के निराकरण स्वयं से प्रप्त कर लेने पर ही बनती हैं, किसी को हानि या लाभ पहुंचाने से नही,यँहा सिर्फ सर्वश्रेष्ठ को उचित सम्मान भी अक्सर वृतालप का विषय बन जाता हैं, क्योकि जब यह समझ आ जाए कि स्वयं कौन हैं तो फिर कई बातें लगभग स्पष्ट होने लगती हैं, ये इस्थिति एक हद तक तो ऐसी है जैसे  किसी को असीमानंद की प्राप्ति हो ये साधन अत्यंत उच्च स्तर के होते है जो किसी को समझ ऐ जा सके ऐसी उपलब्ध ता निश्चित ही उपयोगी होती हैं, यँहा पर विभिन्न तरह की बातें स्पष्ट होती हैं जैसे क्या कोई देवी देवता आपके सहयोग बनते है या आपको विभिन्न तरह के आनर्गल सच्चाई का सामना करना पड़ता हैं, जो इतनी अजीबोगरीब होती हैं कि ...

🙄सोच और परिवर्तन🌾

😀बुद्ध एक ऐसा व्यक्तित्व जो लगभग सभी बातों को जानते और समझते थे, उन्होंने ये कभी नही चाह की कोई आगे चलकर उनकी बातों का गलत मतलब निकले लेकिन फिर भी समय ने बहुत से परिवर्तन किये, महावीर और बुध्द के चिंनतन में फर्क है जंहा बुद्ध ने कई तरह से जीवन की राह को समझ कर आगे के मार्ग को प्रशस्त किया, उसे यथा संभव शारीरिक पीड़ा से दूर रखा, उन्हें दवाओं का पूर्ण ज्ञान था, ऐसा नही की महावीर को नही था, उन्हें भी था, किन्तू महावीर ने कठिन मार्ग को पसंद किया, आश्चर्य इस बात पर की फिर भी लोगो ने स्वीकार किया, तब बुद्ध ने समझ को बेहतर बनाने के लिए बताया कि जीवन कठिन नही है, पर इसमे लोक लाज का अपना स्थान है जो सामान्य के लिए मायने रखता है, इससे ही संसार मे रहने योग्य उचित व्यवहार किये जाते है, यँहा बुद्ध और महावीर की कोई तकरार नही थी, क्योको सब कुछ समझ ने बाद ही कहा भगवतो अरहतो और सम्मासम बुधस्य, 😁 इस पर आगे और लिखेंगे 😄मल्लिका जैन😁

💞बुद्ध और प्रार्थना💤

💌अक्सर  ये समझ उत्पन्न होने में समय लग जाता हैं कि व्यक्ति या कोई समय क्यो किसी समस्या या दुःख या फिर सुख के साथ जीते हैं, यह हमेशा ही विशेष वर्ग का अधिकार रहा है, क्यो ? इसके जवाब देने में शायद इतना समय लग जाये कि सादिया बीत जाए फिर भी यह परस्पर वृतालाप का विषय ही बना रहेगा, क्या किसी की मृत्यु किसी के लिए सुख का कारण हो सकती हैं, या फिर कोई किसी की मृत्यु को कितने समय मे स्वयं या अपने लोगो को उबार सकते है, यह सिर्फ वह ही कर पाते है जो अपने कर्मो में सुधार करते है और प्रयास रत रहते है, तो जिसे हम वर्तमान समय कहते है यह कोविड क्या पहले से निर्धारित था, या नही यह तो पुनः परस्पर वृतलाप का विषय है, तो आज हम यह समझ ने की कोशिश करते है कि ये जो समय है यह किस प्रकार से उपयोगी हो सकता हैं, विभिन्न देशों के सहयोग से कई संशोधन के बाद वेक्सीन या दवाओं के उत्पादन हुए है कुछ लोग ठीक हुए और कुछ नही, बहुत सारी प्रार्थना  और तमाम प्रयास क्या सिर्फ प्रार्थना किसी को ठीक कर सकती हैं तो जवाब है नही क्योकि जब भी कोई किसी के लिए प्रार्थना करता है तो वह उसके लिए साधना अपने कहे गए शब्दों से प्राप्...

😁जीव यात्रा😂

किसी भी मनुष्य या जीव की अपनी यात्रा होती हैं जिसमे उसकी ज़िंदगी बित रही होती हैं कोई कहता है की कमी है और कोई कहता है सब अच्छा है, पर सत्य  सिर्फ कुछ समर्थ के पास होता हैं, तो अब किस अधिकार की बात कोई करता है,में ये समझ और जान कर हैरान हूं कि क्यो कोई उस शिखर पर पहुंच नही पता और कोई क्यो पहुंच जाता हैं, कितना भी प्रयास करें सत्य पर सदैव आवरण ही रहता हैं, क्योकि सत्य वास्तव में सहन नही होता, कोई कैसे देव या दानव बन जाता हैं, कितना ही प्रयास करें पूर्व के रास्ते कैसे दूर हो जाते है क्यो किसी की यात्रा अधूरी रह जाती हैं, ये अधिकार किसके पास है कि वो दिमांग को नियंत्रित कर सके जब कोई यह जान ही नही सका तो विवाद हम करते किससे है,  जब अपने ही जीवन का पता नही तो किसी और कि क्या बात करें खैर यह विवाद सामान्य के लिए नही है और जो इसके जवाबदेही है वो कभी भी न तो सामने आएंगे न ही जवाब देनंगे,। 😂मल्लिका सिंह😁

🙄सोचते हैं क्या कभी बुद्ध दुःखी होते थे🤔

कितना कुछ है बुद्ध के बारे में पर जिस व्यक्ति ने जन्म इतने शानोशौकत में लिया हो वह व्यक्ति और जिसने असीम सुख देख और भोगा वो कभी दुःखी हो सकता हैं क्या?शायद नही,फिर जब दूसरे दूसरे इंसानों या फिर दुःखी परिस्थितियों को देखा तो क्या उन्हें इतनी तीव्र वेदना हुई कि वे सुख का अहसास भूल गए, या शायद  उसे जानना चाहा होगा जिसके कारण दुःख उत्पन्न होता हैं, यथार्थ में ऐसा ही उन्होंने समझ भी लिया तो, फिर जीते कैसे रहे होंगे यह प्रश्न कठिन है क्योंकि समझ वही पायेगा जिसने इस दुःख को भोगा हो और कोई क्यो इस दुःख को बर्दाश्त करेगा, फिर भी जब बुध्द ने ये सब साध लिया तो क्या उन्होंने कभी भी ये चाहा होगा कि कोई मनुष्य इसको भोगे नही इसलिए निर्वान का मार्ग निकाला,पर जब कोई क्यो निर्वाण की तरफ जाता हैं 1 सुख भोगते हुए ऊब गया 2,ऐसे सवाल जिनके जवाब कोई दूसरा दे नही सका 3,सब कुछ जान और समझ लेने के बाद उचित को    क्या करना चाहिए और क्या नही 4,अब मार्ग में जो जरूरत है वे कैसे पूरी होंगी,    (यहाँ जरूरत न सिर्फ शरीक रहन सहन की, बल्कि      आद्यात्मिक जीवन की भी है)। 5,क्योकि निर...

संसार और फिर से न जीवन न मौत

🌾🌿तथागत की कई कहानियां धम्म पद में और उनके कई ग्रंथो में लिखी गई हैं जिन्हें लगभग ऐसा लिखा या कहा मेने ऐसा सुना, तो तथागत  ने जो भी बताया वह उतना ही सार गर्भित आज भी है, जब तथागत महल में थे तब भी वे यह नही जानते थे कि दुःख जैसा भी कुछ होता हैं, और जब महल छोड़ दिया तब वे यह जनते थे कि सुख को छोड़ दिया और दुःख को कैसे सहन या कैसे उसके साथ जीना है यह जानने के लिए वन को गए वँहा भी कई सम्मानित लोगो से मीले और बहुत कुछ सीखा, पर जब उन्हें कोई जवाब न मिला तो उन्होंने स्वयं ही अपनी  एक नई राह चुनी,वो राह क्या है यह भी उनके या सुने गए फिर लिखे गए कई बातों से स्पष्ट है पर उन्होंने वास्तव में क्या पाया होगा यह में अपने ही शब्दों में लिख रही हूं🌾🌿 "जीवन ,जब महल में थे तब राग रंग और सुख के सिवा उनके पिता ने उन्हें कुछ भी देखने ही नही दिया,तो क्योकि वे एक ऐसी स्थिति में रहे होंगे जब उन्होंने जन्म या जीवन को जान लिया कि कोई अणु जब सक्रिय होता हैं तो वह जीवन कैसे बनता है शायद गर्भ के सिद्धांत को पूर्ण रूप से समझ लिया था, फिर जब वे वन में तपस्या कर खुद को तैयार कर रहे थे तब स्वयं के अनुभव से ...