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संदेश

बुद्ध और सफर

कितने दिनों तक बुद्ध ने चला होगा यह तो उनका विषय है  लेकिन जब उन्होंने अपनी आँखें खोली होंगी और जाना होगा कि उनकी तपस्या में क्या वास्तविक हुआ है और   उन्होंने यह समझ कर कि सब कुछ फिर से बनाया जाए  इस का प्रयास पुनः किया। मल्लिका जैन 

सत्य और झूठ जीवन जीने के प्रयास

🙏🕉️☸️⚛️✡️सबसे पहले सवाल उठता है क्या इतने वर्षो की तपस्या सफल हो पाएगी, जवाब कोन देगा, क्या किसी बेवकूफी से भरे हुए  रीती रिवाज में परिवर्तन संभव है सवाल ये है की जिसे हमने यूनिवर्स का क्रिएटर माना है क्या वो क्रिऐटर हैं क्या हम उसे जानते हैं, शायद हां या जो मै जानती हूं वो सत्य कुछ और ही है, तो अब क्या करें क्योंकि शरीर हैं तो जीवन तब तक हैं जब तक जीना ही पड़ेगा अब जब समस्या कोई उत्पन्न हो तो क्या करे, ईच्छा के अनुरूप परिणाम क्या क्रिएटर देगा या वो देना नही चाहता क्या वो बाध्य हैं मुझे उतर या मेरे मन चाहे  फल की प्राप्ति के लिए, या जवाब और भी उसके पास हो सकते है,  मुझे जो चाहिए वो ही चाइ मम व्यक्तित्व मम कार्य प्रित्यार्थे कार्य सिद्ध यार्थे  आवाह्न करिश्ये  मल्लिका जैन 🌟🌅💀🏵️🌕 🕉️☸️⚛️✡️The first question that arises is whether so many years of penance? Will it be successful, who will answer, is it possible to change some foolish customs, the question is whether the one whom we have considered as the creator of the universe is the creator, do we know him,...

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क

प्रोस्पेरिटी मस्ट वर्क हाउ लॉ बिहाइड गेन व्हाट इज माय सेल्फ रियालिजेशन डूइंग विथ रिस्पोनसिबिलीटी इस इंपॉर्टेंट डील विथ सेल्फ एंड ट्रीट विथ द पिपुल, मेनेजेबल थिंग इस इंपोर्टेंट ट्रस्ट स्ट्रेंथ ऑल इस वर्किंग ऑनली व्हेयर सेल्फ पीपुल वी हैव इफ नॉट व्हाट शुड वी डू, कलेक्टिव फोर्स एंड परसेपशान यूज ऑल मेनेजेबल पोसिबिलिटी गिव अंसार  इन दिस ऑल प्रोसेस फैमिली मेंबर इस ऑलवेज इंपोर्टेंट। मल्लिका

🎉जय मंगल👣

💀किसी विशेष ग्रह दशा में पैदा होना फिर उसके लिए तैयारी करना,जिसके लिए वह पैदा हुआ यह तब तक संभव नही जब तक शसक्त और समर्थ स्वयं न हो इसके साथ स्वयं का होश में होना,किसी भी आवश्यक अवस्था जो किस प्रकार से बनाई जा रही हैं तब यह जरूरी होता है,हम जब  भी  उस संबंधित कार्य को करे उसका पूर्ण हो जाने में सक्षम हो, जैसे की कोई डिमांड करते है तब वह कंप्लीट होती है,यह जिसके अफर्ट में कंप्लीट व्यवस्था शामिल हो ह्यूमन बॉडी (कंप्लीट फंक्शन) मेटल बॉडी (रिस्पॉन्सिबिलटी) इमोसनल बड़ी(फंक्शन माइंड थॉट क्रिएट फ्रॉम) चाइल्ड हुड ट्रामा डील विथ सेल्फ एंड फैमिली फैमिली कल्चर डे तो डे थॉट क्रिएशन डील विथ सेल्फ विथ पोलाई टनेस इस सब के साथ हम कोन सा टूल प्रयोग करते है, अपनी समस्याओं को हल करने के लिए जैसे अपने व्यवहार और व्यवसाय में कैसे है,अपने सभी बर्ताव के साथ  👽 मल्लिका जैन 😀😃😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄😄

सेल्फ रियालिजेशन

🌅 सेल्फ रियालिजेशन सर्च फॉर द ट्रुथ व्हाट I am fesing in लाइफ is डिफरेंट एंड समथिंग इंपॉर्टेंट लाइक अनसीन फैक्ट्स दोस इंवॉल बट व्हेयर my यूनिवर्स ? मल्लिका 

💨🔥🌀🌪️शक्ति और धर्म⚡☔👽

👽☠️👻🐂मेरी शक्ति जो धर्म से जुड़ी है उसे मेरी बात सुन नी है मेरे भूत को मेरा साथ देना है  कोई भी ऐसी बात जो परिवार को तकलीफ दे सकती है, उसे समझ कर साल्व करना है किसी परी या अन्य की किसी भी बात में उलझना पड़े तो ये हमारा मान केसे रखेंगे जो स्वतंत्र हो कर हमे नुकसान पहुंचा रहे है उन्हे उनके कर्म का फल स्वयं भोगना होगा मुझे और मेरे भूत मेरा साथ देना है यन्ह आ किसी भी मात्र या पितृ शक्ति से बड़ कर बात यह है की इस्त्री और पुरुष दोनों को ही एक दूसरे का साथ देना है संबंध  तो कई नाम के है और जो उद्देश्य निश्चित किया है उसे पूरा करना ही है जिसने हमारे पुत्र को नुकसान फुचाया है उसे स्वयं सहायता की जरूरत थी ,तो जो शक्ति स्वयं का मान रखती है वह ही आगे जा पाती हैं,किसी और अवस्था में उसका समाप्त होना तय होता है👻☠️🧠🙏

😀बुद्ध और बॉडी फंक्शन😒

समय के साथ चलना और फिर ये समझ पाना की अब मुझे जंहा पहुंचना है,वंहा पहुंच क्यो नही पा रहे, ये ऐसा लगता हैं जैसे कि कोई स्वयम से सवाल पूछ रहा हो,वर्तमान 2023 में क्या ये संभव है कि बुद्ध हो या उनकी  कोई भी बात वेंसी ही हो जैसी उन्होंने कहि उस समय मे कोई ऐसी डिवाइस रही होगी क्या जो मोबाइल या फिर कैमरे की तरह उनकी बातें कही रिकॉर्ड कर के रखी हो, शायद हा, मेरे हिसाब से ज्यादातर मैने ऐसा सुना से उनकी कही हुई कथाए प्ररंम्भ होती हैं, तो ऐसा क्या है कि वो बुद्ध बन गए, तब उनकी बातें मानी गई या फिर उसके पहले भी उनकी बात मानी जाती रही होगी तो जवाब हा ही है क्योंकि वो राजसिक जीवन जीते थे तो आज्ञा न माने ये संभव नही और जब वो तक वो बुद्ध बने तब और फिर आगे भी उनकी बात मानी ही जाती रही, क्या करते होंगे और कौन सा प्रकार करके उन्होंने अपनी बातों को सिद्ध किया था ये सब तो कई प्रकार से बातों का माध्यम बन सकता हैं पर वर्तमान बुद्ध को क्या वनों में जाना होता हैं या  कोई और व्यवस्था होती हैं यँहा कोई जवाब दे तो हम मान पाएंगे  ये स्वयं ही जानना होता हैं आज कोई किसी भी वस्तु या फिर अपनी गृहस्थी का...

अन्तर्दद्वन्द

💐क्या कोई ईस्वर युद्ध का मैदान बनाता है क्या उसमे कुछ साजो सामान रखता है क्या प्यार के क़सीदे अंत पर ही परवान चढ़ते है क्या जिंदगी बेहतर बनाई जाए इसके लिए किसी को तकलीफ होती हैं,या फिर मुझे वह पता नही जंहा सत्य परतों में बंद रहता हैं, क्या बुध्द ने इन सवालों के जवाब दिये हैं कभी क्या सच कभी दिखाई देगा मुझे,  मल्लिका जैन🌸

🕯️उत्सव💡

उत्सव,जब कोई खुद को समझ कर अपने ही जीवन को उत्सव मय बना ले, हम खुद को कैसे समझते सकते है जब किसी के जीवन मे यह ज्ञात हो जाए कि जिसने उन्नति को प्राप्त कर लिया है वो किसी और अपनी उन्नति देना नही चाहता, पर यँहा उन्नति स्वयं के द्वारा आवश्यक होती हैं, जब किसी की सहायता से,कुछ प्राप्त हो और वह यह बार बार बताए कि मैने आपकी सहायता की है तब उत्सव घटित होने हर बार समय लग जाता हैं, यहां देने वाले कि इच्छा सामने या अनजाने में प्रकट होती हैं तब उत्सव घट नही पाते तब वे पूर्णता की कसौटी पर खरे है या नही इस बात अनुमान मात्रा लगाने में समय को लगा देते है, फिर उत्सव कैसे मनाया जाए उत्सव,साहस समझ शांति और धन का प्रतीक हैं, तन,मन,धन,और इन सब को मिला कर धन, क्योकि अधिकार तब बनता हैं जब स्वयं समर्थ बने, कैसे बनोगे पैदा होने से लेकर पूरे जीवन मे और फिर मृत्यु में भी किसी न किसी की जान कर या अनजाने में सहायता मिलती ही है, तो जब हम मित्र वत व्यवहार को समझ लेते है, और क्रोध या नफरत या अन्य ऐसे प्रवृति जो हमे ऐसे पल में रखती हैं जब हम इन पर सामंजस्य स्थापित करते है तब इसे, उत्सव कहते है, यह जान लेते है कि दूसर...

🍋तारा और बुद्ध🍊

बुद्ध और तारा एक दूसरे के सहयोगी है जब भी जंहा भी बुध्द होते है तारा होती हैं, ये दोनों  जब भी उपस्थित होते है,ऐसा कोई भी कार्य जो असम्बभव प्रतीत होता हैं, वह कुछ ही पलों में संपन्न हो जाता हैं यह यथार्थ में सत्य है, बात यह है कि क्या कोई इतना समर्थ वान है जो उस स्तर पर पहुंच सके क्योकि उस सम्बंधित व्यक्ति का उतना समर्थ वान होना आवश्यक है, नही तो सिर्फ एक शिकायत रह जायेगी की मेरे पूजन के उपरान्त भी कार्य सम्पन्न नही हुआ, यह अत्यंत ही संवेदनशील और उच्च स्तर पर संभव होता हैं कुछ ही पलों में रास्ते खुलते हैं और बंद हो जाते है, 😀 😁ॐ तारे😀😁 😁मल्लिका जैन😁

😀नियामत😁

ब्लिस या नियामत इसे समझ ना और तथाकथित किंवदंतियों को समझ कर जो पसंद या उचित नही उसे अलग कर देना और सही बात को स्वीकार कर लेना ये भी अक्सर ऐसे लोगो का खिलौना बन जाता हैं जो इस बात से सहमत हो कर भी सहमत नही होते,मतलब की  वे किन्ही बातों को बोलना ही नही चाहेगे तो अब ब्लिस कैसे प्रप्त हो, क्या दवाई क्या दुआ या फिर स्वयं मृतयू या फिर जन्म या विवाह प्रस्ताव सभी के पास होते है  कोई किसी को स्वीकार करता है और कोई किसी को फिर भी पुनः प्रयास जारी रहते है किसी उचित स्थान पर पहुंच ने बाद भी  😁 😁 मल्लिका सिंह💎

😁वक्त की बात😁

बुद्ध समय मे जा सकते और समय के साथ किन्ही में परिवर्तन कर सकने में समर्थ होते है यह सच है पर क्यो यह करना चाईए यह विचार योग्य प्रश्न है, यँहा व्यवस्था का मतलब और समय का मतलब सिर्फ बात को साबित करना नही होता, क्योकि जो लोग किसी को दिया हुआ वापस ही नही करना चाहते तब क्या किया जाए तब परिवर्तन करना पड़ता हैं, पर जब यह समझ के आ जाये कि विवाद का कारण यह नही की सत्य क्या है, बल्कि यह है कि जिन्हें दया या भूल वश कुछ मिल गया था वे ही अब उस प्राप्त को अपना समाझ ने लगे तो,क्या बुध्द इस तरह के विवाद से भी निपट सकने में समर्थ हैं तो जवाब हा है, पर जब कोई हर समय यह बताया करें कि दया और करुणा बस मूर्ख या ऐसे लोगो का अधिकार है जो कि स्वयं समर्थ नहीं तब,उन्हें बताने के लिए बुद्ध किसी को कुछ भी साबित किये बिना सिर्फ अपना कार्य कर देते है, औऱ जिन योग्य को अयोग्य साबित किया जाता हैं वह स्वयं ही साबित हो जाता हैं, यह न्याय व्यवस्था भी होती हैं  क्योकि व्यवस्था बना कर रखना है और नियम बनाना यह वे स्वयं कर सकते है जो समर्थ होते है इसका मतलब यह नही की जिन लोगों ने कुछ भी किया हो वे उस के अधिकारी हो गए है😀?...

😃समस्याओं का अंत😁

हर दिन विचार करते है कि समस्याए का निराकरण कैसे हो सकता हैं, पर कही न कही कुछ ऐसा होता हैं जो विचार,व्यवहार और व्यवस्था में सुधार के साथ चलता है जिनका व्यवस्था आवश्यक होती हैं जिनमे सुधार की जरूरत होती हैं, पर कोई उन्हें करना नही चाहते ,किसी का कुछ और किसी का कुछ जिस कारण से एक ऐसा तारतम्य व्यवस्थित होता हैं जो सदैव ही सुधार की इस्थित में होता हैं, जिन्हें सुधारना ही होता हैं, पर बात यँहा पर रुकी होती हैं कि उत्तरदायित्व कौन उठायेगा, सहायता किसे मिलनी चाहिये और किसे नही यह भी विचारणीय प्रश्न बन जाता हैं ऐसे सवाल और जवाब की तरह जो कभी तो सदैव ही सवाल होते है और जो कभी ऐसे सवाल जिनके उत्तर सामने ही होते है पर समझ और उपयोग में लाना आसान कैसे बने इस बात पर रुके होते है, जब बात बुध्द की हो तो वे सदैव ही ऐसी  व्यवस्था के साथ चले जो किसी पर लादी न जाये बल्कि व्यवहार में और प्रयोग और उपयोग में आसन हो मतलब जिसे किसी उत्तरदायी व्यक्ति से करवाया जाए और उचित को उसका लाभ प्रप्त हो सके। 😀मल्लिका singh har din vichaar karate hai ki samasyae ka niraakaran kaise ho sakata hain, par kahee na kahee ...

😂स्वयं की इच्छा😂

ज्यादातर समय मनुष्य जब आगे बढ़ने लगता हैं तो उसे कोई जो भी योग्य नही है, वह  रटा हुआ एक राग अलापते है जिसे प्रेम का नाम दिया जाता हैं और जिन्हें कुछ भी नहीं आता वो खुद को इस अंकेन्डिशन लव की आड़ लेकर स्वयं को उस से बेहतर बताते है जो वो खुद नही होते,अब प्रश्न यह उठता है कि क्या जो जीव को यह समझ मे नही आता कि यह संबंधित व्यक्ति क्या चाहता है, आता हैं पर जो लोग किसी दूसरे पर इस तरह से अतिक्रमण करते है वे ही स्वयं को योग्य साबित करते है जबकि होते नही,जीवन के रहस्य आसानी से हर किसी को नही मिलते इसके परिणाम स्वरूप कही क्रोध का जन्म हो सकता हैं या फिर अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाता हैं तो जब कोई जवाब नही मिलता हैं क्या किया जाये और जिनको इस बात का अहसाह भी नही की मर्यादा क्या होती हैं वे निश्चित ही किसी न किसी तरह की तकलीफ तो उठाये गे ही,जो दूसरों की शक्तियों को स्वयं लेते है बिन उसकी मर्जी के ऐसे लोग ही युद्ध को निमंत्रण देते है,जिन्हें ये लगता हैं कि वह व्यक्ति जो ठीक है और अपनी सुरक्षा करना जनता है वे उसे बार बार तंग करते है ये जीव माफी के काबिल नही होते, ये सिर्फ स्वार्थी होते है, ...

😁कार्य😀

 शुभकामनाएं बुद्ध के जन्म, ज्ञान निर्वाण दिवस की कार्य तो करना ही होता हैं, पर उसके परिणाम पर भी विचार करना होता हैं, बुध्द ने क्या कभी कार्य किये होंगे, तो जवाब हा में ही है, बुद्ध स्वयं के तरह से कार्य करते और करवाते भी थे,जब कोई उनकी बातों को सुनता तो वे उसे अपने को उस स्तर को समझ कर बताते थे इसलिए उस सम्बंधित व्यक्ति या भगवान या अन्य के कार्य होते थे, यह सच आज भी उतना ही सत्य और सटीक है। 😀मल्लिका सिंह😁

😁यात्री और यात्रा😁

समय एक ऐसा परिणाम है जो अनन्त है,पर कई ऐसे के प्रमाण मिले हैं जिसमे यह पता चला है कि इससे परे भी जाया जा सकता हैं, विश्वास करना अच्छा है पर अंध विश्वास उचित नही,जो खुद को किसी का दास बना दे ऐसी व्यवस्था ही अक्सर चलती हैं, इसका उदाहरण यह है कि आप किसी न किसी की व्यवस्था के अनुसार चलते हैं जो या तो स्वीकार होती या नही,जो ये व्यवस्था बनाते है वे खुद भी इसी व्यवस्था से आगे निकल आते है फिर जब कोई अपने नियम या निर्णय स्वयं करता है तो स्वयम ही अपने कार्यो के लिए उत्तरदायी बन जाता हैं,पर क्या वास्तव में ऐसा होता हैं, यह कोई जान नही पता और जो जानते है वे इसका कोई सही हल नही बताते, क्योकि वे लगातार ऐसी प्रक्रिया का निर्माण करते है जो पुनः पुनः किसी निर्धारित कार्यवाही की तरफ ले जाती हैं तब, परिणाम मन मुताबिक न हो तो इसे स्वीकार नही किया जा सकता,और व्यक्ति पुनः अपने प्रयासों में लग जाते है यह प्रक्रिया हर बार समय और परिश्रम दोनो ही लेती हैं साथ ही उसमे लगने वाला प्रयास के वंचित परिणाम पर भी प्रभाव डालती हैं 😁मल्लिका सिंह😁

😂धोखा😃

धोखा किसी को भी दिया जा सकता हैं, लेकिन किस को ये लगता है कि उसे धोखा मिल रहा है, क्या आद्यात्मिक शक्ति भी कोई ले सकता हैं तो जवाब है हां यह सदियों से होता आ रहा है, जब कोई भी जो खुद समर्थ वान नही है, वह किसी की शक्तियों को ले लेते है कैसे एक तो सीधे चोरी आदि कर के या फिर जो किसी प्रकार यह बात समझ लेते है कि वे किसी को चीट कर सकते है और लगातार चीट करते है, दूसरा जब कोई किसी से प्रार्थना करता है तो क्या होता हैं, इन प्रार्थना के फलस्वरूप उसे भेंट में क्या चढ़ा न होता हैं, उस संबंधित अधिकारी प्रयोग किये जाने वाले प्रयास जो कि उस चाहे गए कार्य के उच्चतम परिणाम तक नही पहुंच पाते,तब ऐसे लोगो जो स्वयं को उच्च बनाए  रखना चाहते है तो शक्ति क्या होती हैं पहले इस बात को अच्छी तरह से समझ लेते है यह सिर्फ निर्विवाद रूप से उसकी होती हैं जो इसे प्राप्त करता है लेकिन जब किन्ही वजह से वह समझ नही पाते कि हो क्या रहा है तब क्या होता हैं,तब आसानी उसके द्वारा किसी को इनका हस्तांतरण हो जाता हैं,ये ऐसा कु छ भी नही जो किसी को कोई दे सके या ले सके, ये सिर्फ इतना ही है कि प्रयोग करता स्वयम कितना सम्भवतः समझ...

🎆आनन्त ✨

😀अन्नत क्या इसे जाना और समझा जा सकता हैं, क्या इसका अपना कोई समय या स्थान होता हैं क्या इसे किसी की जरूरत है क्या है ये, ये सवाल किस के मन मे उठते रहे है और कौन इसके जवाब मांग रहा है? इतने सारे सवाल जो निरुत्तर से है वे अनन्त से पूछ रहे मालूम होते है तो,सच अक्सर कड़वा होता हैं जिसे जब समझ ही नही आ रहा तो क्या जवाब दे😁आश्चर्य इस बात पर है कि सदियों के पसरे पड़े तमाम निरुत्तर कहि तो जाएंगे ही,जवाब वही अन्नत और सवाल वही अन्नत तो आज अन्नत से अन्नत के सवाल जवाब, आज यँहा किसी जीवित या मृत के प्रश्न नही है, ये प्रश्न वास्तव में अन्नत के जो सिर्फ अपनी विभिन्न वृहद व्यवस्था से गुज़र चूका है और किसी वृहद व्यवस्था से गहन विचार से पुनः प्रवेश करता है, इसके पास स्वतः का कोई कार्य नही फिरभी अस्तित्व तो है, तब कैसे इसका निराकरण हो, इस अन्नत को फिर से कोई अनन्त बनाना है, तो निर्माण पुनः व्यवस्थित नही होगा, क्योकि ये ऐसे ही रहता हैं, पर इसके साथ ही जब ये बाकी से परे है तो भी अपनी व्यवस्था बना लेते है, जिन्हें हम लोग खगोल आदि से समझ ने कोशिश करते है पर ये अन्नत सर्व उपलब्ध नही हो सकता और कोई यँहा जाना नह...

😁विश्वास🤔

विश्वास, किस पर किया जाए क्या किया जा सकता हैं और क्यो,विश्वास एक नाजूक और अत्यंत संवेदनशील  भावना है जो मुश्किल से प्राप्त होती हैं, जैसे प्रार्थना करने वाले को पता होता हैं कि वह, संबंधित अधिकार के लिए अपील संबंधित देवी या देवता या अन्य की विशेष से करता है तो उसका परिणाम उसे प्राप्त होता है,क्या होता हैं जब प्रार्थना अनसुनी रह जाए और हर बार सालो तक करने पर भी जवाब न मिले,तब विश्वास डगमगाने लगता हैं, और प्रार्थना करने वाले को लगने लगता हैं, जिससे वे प्रार्थना कर रहे है वह है ही क्योकि इतने समय तक तकलीफ़ तो वह भोग ही चुका, इस बात को कैसे समझा जाए,यह एक जटिल प्रश्न है जिसका जवाब भुक्तभोगी अत्यंत तीव्र तकलीफ के कारण कष्टमय मन से सहता है,तब कही न कही मन मे शत्रुता भाव भी पैदा हो जाता है यह होता विश्वास का परिणाम, और जब यही बात समस्याओं के निराकरण पर लागू होती हैं तब विश्वास प्रबलता से और गहरा हो जाता हैं, यह दोनों प्रक्रिया 2 तीव्र संवेदना व्यक्त करती हैं यह सम्मान और अपमान दोनो ही इसके परिणाम में आते है लेकिन सम्मान सुख दायक और अपमान दुःख दायक होता हैं, जिसमे किये गए समस्त प्रयास शामि...

🤔हरफनमौला🤗

क्या है जो बुध्द को पता चल गया था, शायद हरफनमौला जैसा कुछ मतलब उस समय मे बुध्द वह सब जान गए थे,जो आज के लोग या अधिकृत वर्ग समझ मे आने और जानने की कोशिश करता है यँहा मेरा मतलब वह प्रयोग और उनकी शरीर से संबंधित  सारी जानकारी जो किसी को यूनिवर्स से जोड़ती है जैसें जब कोई ध्यान या शरीर को अत्यधिक कष्ट दे कर तपस्या से प्राप्त करता है तो वह जो प्राप्त करते है वह किसे बताने और समझने योग्य हैं और किसे नही, यँहा उस समय मे भी ऐसे कई तरह के व्यक्ति रहे होंगे जो अमूमन अपनी ही बात करते रहे होंगे,और उसे साबित करने के वृहद प्रयोग,तो यह सिर्फ बुध्द ही कर पाते थे क्योकि वे पर्यावरण जो पृथ्वी पर है, जो इस पृथ्वी के बाहर याने जिसे हम बियॉन्ड कहते है उसे जान गए थे  विचार मंडल का महत्व और इस संसार मे जब प्रवाह उन्मुक्त हो जाते है तो इसका अर्थ क्या होता हैं, यह सब बुध्द समझ गए थे साथ ही क्योकि पृत्वी पर उतपन्न होने के कारण शरीर की विवशता से वे परे हो गए थे,उसे जान और समझ कर सब को नही बताते, क्योकि यह वास्तव में अन्य का विषय था ही नहीं।🤔 😊मल्लिका जैन😀